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भील जनजाति संपूर्ण विवरण : Bhil Tribe Complete Information-2

भील जनजाति का इतिहास एवं संस्कृति                              भील जनजाति  के प्रमुख मेले बेणेश्वर मेला  :-                     ' आदिवासियों का कुम्भ ' नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वर का मेला  भीलों का सबसे बड़ा मेला  है जो  माघ माह की पूर्णिमा  को  डूंगरपुर जिले में सोम,माही एवं जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम  पर भरता हैं। घोटिया अम्बा  :-                      बेणेश्वर के अलावा एक और बड़ा मेला भरता है ' घोटिया अम्बा मेला '। यह मेला बांसवाड़ा जिले में घोटिया नामक स्थान पर  चैत्र अमावस्या  को भरता हैं। गोतमेश्वर मेला  :-                       गौतमेश्वर का मेला प्रतापगढ़ जिले में  अरनोद कस्बे के पास वैशाख पूर्णिमा  को भारत हैं। ऋषभदेव मेला  :-             ...

भील जनजाति संपूर्ण विवरण : Bhil Tribe Complete Information-1

भील जनजाति का इतिहास एवं संस्कृति भील जनजाति  :-                       भील भारत की सबसे प्राचीन व मीणा जनजाति के बाद राजस्थान की दूसरी  सबसे बड़ी जनजाति  हैं। भील जनजाति एक योद्धा जनजाति के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। वैसे तो भील जनजाति लगभग संपूर्ण राजस्थान में पायी जाती हैं ;  बाड़मेर ,  जालोर ,  सिरोही ,  पाली ,  कोटा ,  झालावाड़  आदि जिलों में लेकिन विशेषकर  दक्षिणी राजस्थान  के उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ जिलों में भील जनजाति पायी जाती हैं। भील जनजाति  उदयपुर जिले में सर्वाधिक  हैं। राजस्थान के अलावा भील जनजाति गुजरात ,महाराष्ट्र तथा मध्यप्रदेश राज्यों में भी पाई जाती हैं। राजपूती राज्यों के उदय से पहले राजस्थान में जिस प्रकार मीणाओं, गुर्जरों व जाटों का शासन था; उसी प्रकार  दक्षिणी राजस्थान व हाड़ौती अंचल  में भीलों के कई छोटे-छोटे  राज्य  थे।  भील शब्द की उत्पत्ति प्राचीन संस्कृत साहित्य में सभी  वनवासी जातियों  ...
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सरकारी सेवा में पदस्थापित धीरज व्यास वर्षों से अध्यापन क्षेत्र में सक्रिय है। आप इंटरनेट पर हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक होने के साथ साथ शिक्षा के महँगी होने के पुरजोर विरोधी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को कम शुल्क में छात्रों तक पहुँचाना आपका ध्येय है।

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