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राजस्थान में क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम : State Planning Programme in Rajasthan

राजस्थान में क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम क्षेत्रीय  विकास  कार्यक्रम सुखा  संभावित  क्षेत्र  विकास  कार्यक्रम:- यह सन् 1974-75 में शुरू किया गया। इसमें केन्द्र व राज्य सरकार की 50: 50 की भागीदारी हैं। इस योजना का मुख्य उद्देष्य सूखे की सम्भावना वाले क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार करना हैं। मिट्टी व जल का संरक्षण करना हैं। जल संसाधनों का विकास करना हैं। वृक्षारोपण पर बल देना हैं। यह योजना वर्तमान में चल रही हैं। 11 जिलों में संचालित हैं:- 1. अजमेर 2. कोटा 3. बांरा 4. टोंक 4. झालावाड़ 5. उदयपुर 6. डुंगरपुर 7. बांसवाड़ा 8.सवांईमाधोपुर 9. भरतपुर 10. करौली। इस योजना में जलग्रहण क्षेत्र के सर्वांधिक विकास करने पर सर्वांधिक बल दिया गया, जो ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई थी। मरू  विकास  कार्यक्रम (1977-78):- सन् 1985-86 तक इसका खर्च केन्द्र व राज्य के बीच विभाजित किया गया था। इसके बाद सन् 1986 में इसका खर्च केन्द्र सरकार वहन करने लगी। यह योजना 16 जिलों में संचालित हैं, जो सभी पष्चिमी राजस्थान व दक्षिणी राजस्थान के हैं। उदयप...

राजस्थान में सहकारी संस्थाऐं : Corporation Limited in Rajasthan

राजस्थान   में  सहका री   संस्थाऐं -     स्पिनफेड :- >     सन्  1993  में   गंगापुर ,  गुलाबपुरा  ( दोनो   भीलवाड़ा )  व   हनुमानगढ़   की  सहकारी   मिलों   को   सम्मिलित   कर   स्पिनफेड   बनाया   गया। >     इसका   कार्य   रूई   या   कपास   खरीदना   एवं   सूत   बनाना   व   इसकी   बिक्री   करना हैं।   यह   बम्बई   की   सूती   मिलों   को   बिक्री   करता   हैं। -      गंगानगर   सहकारी   कॉटन   कॉम्पलेक्स :- >     इसकी   स्थापना   सन्  1986  में   हनुमानगढ़   में   की   गई   थी। >     इसको   विष्व   बैंक   से   धन   मिलता   हैं। -     केशोरा ...

राजस्थान की प्रमुख सिंचाई व नदी घाटी परियोजनाएं

Rajasthan Gk in Hindi राजस्थान में देश के कुल सतही जल का मात्र 1.16 प्रतिशत जल उपलब्ध है। इंदिरा गांधी नहर राजस्थान की सबसे बड़ी तथा महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है। बीसलपुर बांध राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। राज्य में न्यूनतम सिंचाई, सिंचित क्षेत्र के आधार पर चुरू में व राज्य के कुल सिंचित क्षेत्रफल के आधार पर राजसमंद जिले में तथा अधिकतम सिंचाई गंगानगर व हनुमानगढ़ में होती है। राजस्थान में गेहूं की फसल का सिंचित क्षेत्र सर्वाधिक है। इसके पश्चात सरसों व कपास का स्थान आता है। राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन (Major sources of irrigation in Rajasthan) 1. कुएं एवं नलकूप (Wells and Tubewells ) राज्य में कुओं एवं नलकूपों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई (65.67 प्रतिशत) होती है। कुओं एवं नलकूपों से सिंचाई जयपुर (सर्वाधिक), भरतपुर, अलवर, उदयपुर व अजमेर जिलों में होती है। जैसलमेर के पूर्व में स्थित चांधन नलकूप मीठे पानी का थार का घड़ा कहलाता है। 2. नहरें ( Canals)  भारत में सर्वाधिक सिंचाई नहरों द्वारा लगभग 39 प्रतिशत भाग पर होती है। राजस्थान में 32.84 प्रतिशत क्षेत्र ...

राजस्थान में कृषि एवं फसलें (Agriculture and Crops in Rajasthan)

Rajasthan Gk In Hindi स्वतंत्रता से पूर्व राजस्थान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि  था। राजस्थान की कुल कार्यशील जनसंख्या का लगभग 70 प्रतिशत रोजगार की दृष्टि से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से  कृषि एवं पशुपालन  पर निर्भर है। राजस्थान राज्य की सम्पूर्ण आय का लगभग 52 प्रतिशत कृषि एवं इससे संबंधित क्षेत्रों से होती है। राजस्थान में भारत के कुल कृषिगत क्षेत्रफल का 10.2 प्रतिशत है। राजस्थान के कुल कृषिगत क्षेत्रफल का 2/3 भाग खरीफ के मौसम में बोया जाता है। राजस्थान के कुल  कृषि  क्षेत्रफल का लगभग 32.4 प्रतिशत भाग सिंचित है। खाद्यान्न फसलें (Cereals) राजस्थान में खाद्यान्नों में गेहूं, जौ, चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार, रबी एवं खरीफ की दलहन फसलें शामिल हैं। 1. गेहूं (Wheat) राजस्थान का गेहूं के उत्पादन में  भारत में चौथा स्थान  है। भारत के कुल गेहूं उत्पादन का 8 प्रतिशत राज्य में होता है। राजस्थान में गेहूं सर्वाधिक मात्रा में एवं सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र में उत्पादित होने वाली फसल है जो रबी की फसल है। राज्य में  सर्वाधिक   क्...
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सरकारी सेवा में पदस्थापित धीरज व्यास वर्षों से अध्यापन क्षेत्र में सक्रिय है। आप इंटरनेट पर हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक होने के साथ साथ शिक्षा के महँगी होने के पुरजोर विरोधी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को कम शुल्क में छात्रों तक पहुँचाना आपका ध्येय है।

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