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Rajasthan mein kisan aandolan: राजस्थान के किसान आंदोलन-4

राजस्थान के किसान आंदोलन-4 राजस्थान के बूंदी का किसान आंदोलन   ➤ बूंदी किसान आंदोलन की शुरुआत 1926 में पंडित नयनू राम शर्मा’ के नेतृत्व में हुई। ➤ बूंदी किसान आंदोलन लगभग 17 सालों तक चला था। ➤ बूंदी किसान आंदोलन मुख्यत प्रशासन के विरोध था। ➤ बूंदी किसान आंदोलन को बरड किसान आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। ➤ बरड आंदोलन की शुरुआत डाबी के आसपास के क्षेत्र में 1922-25 के मध्य हुई थी। ➤ बूंदी के दक्षिण पश्चिम में मेवाड़ राज्य के पास वाला क्षेत्र भी बरड के नाम से जाना जाता है। ➤ बरड क्षेत्र में अगस्त 1920 में साधु सीताराम दास ने डाबी में किसान पंचायत की स्थापना की।   ➤ राजपुरा के हरला भड़क को किसान पंचायत का पहला अध्यक्ष बनाया गया। ➤ बूंदी का किसान आंदोलन बिजोलिया किसान आंदोलन से प्रभावित व राजस्थान सेवा संघ से प्रोत्साहित था। ➤ बूंदी के किसानों ने 1922 में बूंदी सरकार के विरुद्ध आंदोलन प्रारंभ किया  ➤ बूंदी रियासत का बरड किसान आंदोलन राजस्थान सेवा संघ के कार्यकर्ता भवर लाल सोनी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ।  ➤ 29 मई 1922 को लंबाखोह गांव में एक सभा...

Rajasthan mein kisan aandolan : राजस्थान के किसान आंदोलन-3

राजस्थान के किसान आंदोलन-3 बीकानेर किसान आंदोलन ➤  बीकानेर के किसान आंदोलन को 2 हिस्सों में बांटा जा सकता है।  ➤ पहले हिस्से में आंदोलन का कारण गंगनहर से सम्बन्धित समस्याओं के कारण हुआ और दूसरे में आंदोलन का कारण बीकानेर से जुड़े जागीरी गांव बने। ➤ सिंचाई के लिए 1929 में नहरी क्षेत्र के जमीदार संघ ने यह आंदोलन प्रारंभ किया।  ➤ विवाद का कारण सिंचाई के लिए वसूला जाने वाला कर आबियाना बना। ➤ किसानो की शिकायत थी कि कर वसूलने के बाद भी उन्हें सिंचाई के लिए पूरा पानी नहीं दिया जा रहा है।  ➤ संघर्ष के लिए 19 अप्रैल 1929 में जमीदार संघ का गठन किया गया।   ➤ सिख किसान दरबार सिह को जमींदार संघ का अध्यक्ष बनाया गया।  ➤ 10 मई 1929 को श्री गंगानगर में संघ की बैठक में एक मांग पत्र तैयार किया गया। जिसके लिए आजादी तक संघ संघर्ष करता रहा। आजादी के बाद किसानों की मांगे मान ली गई। ➤ आंदोलन का दूसरा चरण 1934 में शुरू हुआ जब किसानों ने जागीरदारों द्वारा लगाई गई लागतों के विरोध करना शुरू किया।  ➤ किसानो ने बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह को एक प्रार्थना पत...

Rajasthan mein kisan aandolan : राजस्थान के किसान आंदोलन-2

राजस्थान के किसान आंदोलन मारवाड़ किसान आंदोलन (1923-1947) ➤ मारवाड़ के किसान आंदोलन का सूत्रपात सन् 1922 में हो गया जब बाली व गोडबाड़ के भील-गरासियों ने मोतीलाल तेजावत के एकी आंदोलन से प्रभावित होकर जोधपुर राज्य को लगान देने से इंकार कर दिया। ➤ मारवाड़ हितकारिणी सभा ने जयनारायण व्यास के नेतृत्व में मादा गाय, भैंस और बकरी को राज्य से बाहर मुम्बई, अहमदाबाद, नसीराबाद और अजमेर भेजने के विरूद्ध जन आंदोलन किया। ➤ अगस्त 1924 में यह आंदोलन सफल हो गया और राज्य ने मादा पशुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।  ➤ सन 1929 को मारवाड़ हितकारिणी सभा ने जागीरों के किसानों को लाग-बाग तथा शोषण से मुक्ति दिलवाने के लिए पुनः आंदोलन चलाया। ➤ इस समय किसानो को 136 तरह की लाग और बेगार देनी पड़ती थी। ➤ जयप्रकाश नारायण के तरूण राजस्थान समाचार पत्र में इस आंदोलन को प्रमुखता से छापा गया। ➤ जोधपुर राज्य ने तरूण राजस्थान पर प्रतिबंध लगाते हुए 20 जनवरी 1930 को जयनारायण व्यास, आन्नदराज सुराणा तथा भंवर लाल सर्राफ को बंदी बना लिया।  ➤ ठिकाने के खिलाफ 7 सितम्बर 1939 को लोक परिषद के नेतृत्व में किसान...

Rajasthan mein kisan aandolan : राजस्थान के किसान आंदोलन-1

राजस्थान के किसान आंदोलन भाग-1 ➤ राजस्थान के किसान आंदोलनों के पीछे सबसे बड़ा कारण लगान के अलावा कई प्रकार की कर वसूला जाना था, जिनकी संख्या 100 से अधिक थी। लाग का नाम और विवरण         1.खिचड़ी:-  रा ज्यकी सेना जब किसी गांव के पास पड़ाव डालती, उसके भोजन के लिए गांव के लोगों से वसूल की जाने वाली लाग। 2.अखराई:-  राज्य कोष में जमा होने वाली राशि पर दी जाने वाली रसीद पर एक रूपये पर एक पैसा लिया जाने लगा। 3.कमठा:-  गढ़ के निर्माण व मरम्मत हेतु दो रूपये प्रति घर से वसूले जाते थे। 4.कांसा:-  शादी अथवा गमी के अवसर पर ठिकाने को दी जाने वाली रकम के साथ कम से कम पच्चीस पत्तल खाना भेजना। 5.खरड़ा:-  श्रमजीवी जातियों यथा भांबी, मोची, छीपा, कुम्हार आदि से वसूली जाती थी। 6.चूड़ा:-  ठिकानेदार की पत्नी द्वारा नया चूड़ा पहनने पर मूल्य काश्तकारों द्वारा वसूला जाता था। 7.पावणा पावरा:-  जागीरदार अपने मेहमानों पर होने वाले खर्चे को गांव वालों से वसूल करता था। 8.राम-राम लाग:-  इसे मुजरा लाग भी कहा जाता है। इसे प्रति व्यक्ति एक रूपये के ...
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सरकारी सेवा में पदस्थापित धीरज व्यास वर्षों से अध्यापन क्षेत्र में सक्रिय है। आप इंटरनेट पर हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक होने के साथ साथ शिक्षा के महँगी होने के पुरजोर विरोधी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को कम शुल्क में छात्रों तक पहुँचाना आपका ध्येय है।

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